दिल्ली का 14 साल का जयंत बनेगा जैन मुनि


पूर्वी दिल्ली के कृष्णा नगर निवासी एक 14 साल का बच्चा जयंत बुच्चा के मन-मस्तिष्क में धर्म की ऐसी प्रभावना हुई कि वह मुनि दीक्षा लेने जा रहा है। उसकी भावना और श्रद्धा को देख उसके परिजनों ने भी उसका पूरा साथ दिया। इससे पूर्व जयंत बुच्चा के सम्मान में जैन श्वेताम्बर तेरापंथ सभा गांधीनगर एवं शाहदरा की ओर से एक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस दौरान सजी-धजी बग्गी में जयंत को बैठाकर भव्य शोभायात्रा निकाली गई। इसके उपरांत जैन मुनियों ने उसे आशीर्वाद दिया। इस अवसर पर जयंत ने कहा कि जैन धर्म के प्रचार और प्रसार के लिए वह मुनि बनना चाहता है।

कार्यक्रम में बोलते हुए जैन मुनि विजय कुमार ने कहा कि वि विविधताओं का संगम है। कहीं उमंग के पलाश खिलते हैं तो कहीं अवसाद की बर्फ पिघलती है। कहीं जन्म की खुशियां गीत के माध्यम से ब्यक्त की जाती हैं तो कहीं मौत का पैगाम सुनते ही कंपकपी उठ जाती है। प्रकृति की ऐसी क्षणभंगुरता को जानकर मनुष्य अध्यात्म की दिशा में प्रस्थान करे। भोग से त्याग की ओर बढ़ता एवं गुरु के चरणों में सर्वात्मना समर्पित हो जाना ही दीक्षा है। इसी बारे में मुनि कुलदीप कुमार ने कहा कि भारतीय संस्कृति में दीक्षा को एक निर्माणकारी अनुष्ठान बताया गया है। जैन, बौद्ध और वैदिक तीनों संस्कृतियों में दीक्षा की गौरवमयी परम्परा रही है।

मुनि ने कहा कि जयंत दीक्षा ग्रहण कर जीवन की श्रेष्ठता को प्राप्त करे, यही मेरी मंगल कामना है। मुनि संभव कुमार और मुकुल कुमार ने जयंत को दीक्षा के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम प्रवक्ता प्रमोद दुगड़ ने बताया कि दो महीने बाद जयंत को कोलकाता में आचार्यश्री तुलसी जी से दीक्षा ग्रहण करेगा। इस मौके पर गोविंद बाफना, आसकरण आंचलिया, रीता चोरड़िया, कमल गांधी, सुपारस दुगड़, महेंद्र श्यामसुखा, निर्मल कोठारी, विकास नाहटा, कुलदीप बुच्चा, हेमा बुच्चा आदि मौजूद थे।


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