मुनि सुधासागर जी की प्रेरणा से बन रहा उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा जैन तीर्थ


बुंदेलखंड में मिटटी के एक ऊंचे टीले पर बना प्राचीन श्री 1008 पार्श्वनाथ दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र क्षेत्रपालजी मंदिर एक अतिप्राचीन और अतिशयकारी क्षेत्र है। ऐसे अतिशयकारी क्षेत्र की जर्जर अवस्था देख मुनि पुगंव सुधासागर जी महाराज ने वर्ष 2012 को इसके जीर्णोद्धार की नींव डाली थी। उस समय मुनिश्री सुधासागर जी महाराज ने यह सोचा तक नहीं होगा कि जिस मंदिर के जीर्णोद्धार की नीव उन्होंने डाली है, वह एक दिन प्रदेश का सबसे भव्यतम और बड़ा तीर्थक्षेत्र होगा। यह उन्हीं का प्रभाव है कि श्रीक्षेत्रपालजी मंदिर प्रदेश का सबसे बड़ा तीर्थ बनाने हेतु उसको स्वरूपित किया जा रहा है।

shri-kshetrapal-jain-temple

अक्षरधाम की तर्ज पर राजस्थानी शैली में बन रहा यह मंदिर बुदेलखंड ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश में जैन समाज का सबसे बड़ा मंदिर होगा। इस मंदिर के लगभग तीन वर्ष में पूर्ण हो जाने की संभावना है। मंदिर कमेटी के अध्यक्ष पंकज जैन ने बताया कि जीर्णोद्धार में स्थानीय समाज के साथ उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, दिल्ली, बिहार समेत राजस्थान का समाज सहयोग कर रहा है। मंदिर की बनावट इस प्रकार की होगी कि यह पूरी तरफ से खुला रहेगा। राजस्थानी पत्थरों के बड़े स्तम्भ होंगे।

मंदिर की वास्तुकला का नमूना आप इससे ही लगा सकते हैं कि मंदिर के किसी भी हिस्से से 21 फुट ऊंची बड़े बाबा की प्रतिमा के दर्शन किये जा सकते हैं। परिसर में नंदीर दीप, 24 समोशरण का निर्माण भी होगा। परिसर के बीच में 111 फुट ऊंचा कृति स्तम्भ का निर्माण भी हो रहा है, जिसमें 1008 भगवानों की प्रतिमाएं विराजित होंगी। मंदिर के मुख्य द्वार पर राजस्थानी पत्थरों से विशालकाय सिंह द्वारा बनाएं जाएंगे। इसके अलावा आने वाले श्रद्धालुओं के लिए खुला परिसर एवं भव्य धर्मशाला का निर्माण कार्य भी चल रहा है, जिसमें भोजन की व्यवस्था भी होगी। इसके अलावा भविष्य में जैन समाज के बच्चों को गुरुकुल पद्धति से पढ़ाने हेतु शिक्षा की योजना भी है।


Comments

comments