पुरस्कार देने से समाज की शक्ति बढ़ती है : चारुकीर्ति जी स्वामी

श्रवणबेलगोला में सम्पन्न परिषद के पुरस्कार समर्पण समारोह का भाव-चित्र।

श्रवणबेलगोला (कर्नाटक)। प्रभावना जनकल्याण परिषद का वार्षिक पुरस्कार वितरण समारोह श्रीक्षेत्र श्रवणबेलगोला में परम पूज्य वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी महाराज ससंघ, पूज्य आचार्य श्री पंचकल्याणक सागर जी महाराज ससंघ, पूज्य आचार्य श्री चन्द्रप्रभ सागर जी महाराज ससंघ, पूज्य आचार्य श्री कुमुदनंदी जी महाराज ससंघ, पूज्य मुनि श्री अमित सागर जी महाराज ससंघ और श्रवणबेलगोला में विराजमान अन्य सभी पूज्य संतों के मंगल सान्निध्य में 25 दिसम्बर 17 को दोपहर में परिषद के परम संरक्षक पूज्य जगतगुरू  स्वस्ति श्री चारुकीर्ति जी भट्टारक स्वामी जी के मङ्गल निर्देशन में जैन मठ में भारी उत्साह और प्रभावना पूर्वक आयोजित किया गया।

सर्वप्रथम पंडित प्रद्युम्न जैन शास्त्री जयपुर ने मंगलाचरण प्रस्तुत किया। समारोह के मुख्य अतिथि उद्योगपति श्री कपिल मलैया जी सागर रहे। विशिष्ट अतिथि मूर्धन्य विद्वान डॉ श्रेयांस जी जैन बड़ौत, श्री कैलाश पाटनी जी किशनगढ़, श्री पदमचंद धाकड़ा चेन्नई रहे। समारोह का संचालन परिषद के कार्यकारिणी सदस्य श्री राजेन्द्र जैन ‘महावीर’ सनावद ने किया। आभार संयोजक श्री अनिल शास्त्री सागर ने व्यक्त किया। अध्यक्षता श्री सुरेश जैन मरौरा ने की।

इस अवसर पर निम्नलिखित पुरस्कार पूज्य चारुकीर्ति जी स्वामी, पुरस्कार पुण्यार्जकों ने अपने कर कमलों से प्रदान किये-

विद्यान्वेषी आचार्य वर्द्धमान सागर पुरस्कार-ब्र. समता दीदी इंदौर को 21000/-राशि के चैक के साथ प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिह्न, शाल, श्रीफल, किट, साहित्य आदि प्रदान किया गया।

श्रुतसेवी यंग अवार्ड- श्री पंडित सुनील जैन शास्त्री नागौद (सतना) को 11000/-राशि के चैक के साथ प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिह्न, शाल, श्रीफल, किट, साहित्य आदि प्रदान किया गया।

बाबू बालचंद्र मलैया स्मृति पुरस्कार-प्राचार्य श्री सुमति प्रकाश जैन नैनागिर जिला छतरपुर को 11000/- राशि के चैक के साथ प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिह्न, शाल, श्रीफल, किट, साहित्य आदि प्रदान किया गया।

डॉ माणक चन्द जैन मुंडफोडा उदयपुर को परिषद ने ‘साहित्य मर्मज्ञ’की उपाधि से अलंकृत करते हुए प्रशस्ति पत्र, शाल, माला, प्रतीक चिन्ह भेंट किया गया।

इस अवसर पर पूज्य स्वस्ति श्री चारुकीर्ति जी स्वामी जी ने अपने संबोधन में कहा कि युवा ही धर्म परंपरा को चलाने वाले हैं। युवाओं पर ही हमारी समाज का भविष्य टिका हुआ है।पुरस्कार देने से समाज की शक्ति बढ़ती है। पुरस्कारों से कार्य करने के लिए ऊर्जा प्राप्त होती है। आप जैसे युवाओं को ही भूतबलि, पुष्पदन्त, अकलंक, निकलंक बनकर जैनधर्म की पताका को आगे ले जाकर दिग-दिगंत तक फैलाना है। परिषद ने अल्प समय में ही अनेक रचनात्मक और प्रभावी कार्य किये हैं, परिषद ऐसे ही आगे समाज के लिए अपना योगदान देती रहे।

परम पूज्य आचार्य श्री वर्द्धमान सागर जी महाराज ने अपना मङ्गल आशीष प्रदान करते हुए कहा कि परिषद द्वारा प्रेरणादायक पुरस्कार प्रदान किये जाते हैं, इससे जीवन में प्रेरणा मिलती है। परिषद अपने नाम के अनुरूप कार्य में संलग्न है। इस प्रकार के आयोजनों से कार्य करने वाले का उत्साह बढ़ता है साथ ही लोगों के लिए अनुकरणीय भी होते हैं।

आयोजन में देश के मूर्धन्य विद्वान डॉ श्रेयांस जैन जी बड़ौत, युवा मनीषी डॉ. सुनील जैन संचय जी ललितपुर, ब्र. श्रद्धा दीदीजी, श्री ब्र. गज्जू भैया, प्रतिष्ठाचार्य कुमुद जी सोनी, प्राचार्य श्री  सुरेन्द्र जैन जी भगवा, ब्र. प्रदीप जी पीयूष, श्री सुनील शास्त्री सोजना, श्री मनीष शास्त्री शाहगढ़, श्री राजेन्द्र जैन महावीर सनावद,श्री राजेश रागी पत्रकार बक्सवाहा, पंडित प्रद्युम्न शास्त्री जयपुर,श्री अनिल जैन साहित्याचार्य सागर, पंडित रमेश जैनजी, पंडित शीलचंद शास्त्रीजी, पंडित राजेशजी शास्त्री श्रवणबेलगोला, पंडित प्रमोद जैनजी शास्त्री, पंडित ऋषभ जी जैन, श्री सुजस जैन मरौरा दिल्ली,श्री प्रदीप जैन टीकमगढ़ आदि को महामस्तिकाभिषेक समिति के पदाधिकारियों द्वारा सम्मानित किया गया।

 

  • Dr. Sunil Sanchay

 


Comments

comments