150 वर्ष पुराने चमत्कारिक अति प्राचीन मंदिर का नव-निर्माण जल्द शुरू


शिवपुरी नगर में  पुरातात्विक धरोहर के रूप प्रसिद्ध श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर स्थित है। इस मंदिर के चमत्कार के बारे में मंदिर के अध्यक्ष उत्तर चंद्र जैन एडवोकेट ने बताया कि यह मंदिर नगर के सबसे प्राचीनतम मंदिरों में से एक है। इस मंदिर का निर्माण आज से लगभग 150 वर्ष हुआ था। मंदिर के चमत्कार के रूप में ऐसा कहा जाता है कि उत्तर प्रदेश के मऊरानीपुर में बन रहे जैन मंदिर के लिए काले पाषाण की भगवान पार्श्वनाथ की मनोहारी प्रतिमा को मऊरानीपुरवासी बैलगाड़ी से अपने नगर ले जा रहे थे किंतु उनकी बैलगाड़ी शिवपुरी के पार्श्वनाथ मंदिर से आगे बढ़ी ही नहीं। काफी कोशिश के बाद जब बैलगाड़ी मंदिर से आगे ही नहीं बढ़ी तो मऊरानीपुरवासी भगवान पार्श्वनाथ की इस मूर्ति को शिवपुरी जैन समाज को सौंप गये। तत्पश्चात समाज के लोगों ने विधि-विधान से इस मूर्ति की स्थापना तत्समय निर्मित पार्श्वनाथ जिनालय में कर दी। वर्तमान में इस जैन मंदिर की हालत जीर्ण-क्षीण हो गयी है। इस मंदिर के पदाधिकारियों ने शिवपुरी के महावीर जिनालय में चातुर्मास कर रहे मुनि अभय सागर जी, मुनि प्रभात सागर जी और पूज्य सागर जी को मंदिर की जीर्ण-क्षीण अवस्थता के बारे में बताया और इसके जीर्णोद्धार का एक प्रस्ताव रखा तो वे पार्श्वनाथ जिनालय दर्शन हेतु आए और फिर इन अति प्राचीन मंदिर को नये सिरे से निर्माण करने की प्रेरणा जैन समाज को दी। इस तरह मुनि की प्रेरणा 150 वर्ष पुराने एक अति प्राचीन धरोहर के लिए वरदान साबित हुई।


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