क्रोध मनुष्य को पशुता के स्तर पर पहुंचा देता है : मुनिश्री पुलक सागर


मुम्बई में चातुर्मासरत मुनिश्री पुलक सागर जी महाराज ने आपस में एक-दूसरे के साथ प्यार और सम्मान के साथ रहने की बात बतायी। उन्होंने कहा कि क्रोध मनुष्य को अंधा बना देता है और क्रोध में मनुष्य पशुतास्तर से भी नीचे गिर जाता है। उन्होंने कहा जिस परिवार में एक दूसरे का सम्मान और आदरभाव होता है, वह परिवार सुखी और खुशहाली से परिपूर्ण रहा करता है। उन्होंने यह भी कहा कि जहां चार बर्तन होंगे, खटक जरूर होगी किंतु हमें ऐसे क्षणिक खटक के पल को सदबुद्धि से निकल जाना ही खुशहाली का एकमात्र उपाय है। उन्होंने यह भी कहा कि क्रोध में मनुष्य बोलता नहीं बल्कि बकता है और वह क्या-क्या बक जाता है, बाद में उसे स्वयं ही नहीं पता होता। क्रोध ज्यादा देर तक नहीं टिकता, यह मात्र क्षण भर का होता है। यदि उसी क्षण को आपने बुद्धि और सत्कर्मम से निकाल दिया तो जीवन में खुशियां ही खुशियां होंगी।

क्षणिक क्रोध में मनुष्य क्या से क्या कर देता है। इसे एक कहानी के रूप में मुनिश्री ने बतौर उदाहरण समझाया:- गांव का एक किसान  एक दिन नेवले को घर ले आया। कुछ दिन बाद किसान खेत जाता तो नेवला उसके साथ-साथ जाता और जब घर वापस आता नेवला उसके साथ आता। कुछ ही दिनों में किसान और उसकी पत्नी का नेवले के साथ ऐसा व्यवहार हो गया कि एक पल को नेवला आंखों से ओझल होता तो उसकी पत्नी परेशान हो जाती। यहां तक कि किसान की पत्नी कहीं बाहर जाती तो नेवला उसके घर की रखवाली करता। एक दिन की बात है किसान खेत पर चला गया और उसकी पत्नी बाजार से सामान लेने चली गयी। नेवला घर की चौखट पर ही बैठा घर की रखवाली  करने लगा।  थोड़ी देर बाद किसान की पत्नी सामान का टोकरा सिर पर रखकर वापस घर लौटी तो उसने देखा कि नेवले के मुंह में खून लगा है।

उसे लगा कि मैं अपने छोटे बच्चे को खाट पर सुलाकर सामान लेने गयी थी। इसने मेरे बेटे को मार दिया है। ऐसा सोच किसान की पत्नी क्रोध से आग-बबूला हो गयी और उसने सामान से भरा टोकरा नेवले के ऊपर गिरा दिया। टोकरा गिरते ही नेवला मर गया। वह भागी-भागी अंदर अपने बेटे को देखने पहुंची तो उसके होश उड़ गये। उसने अंदर जाकर देखा कि उसका बेटा अंगूठा चूस रहा है और पास ही एक सांप, जो बच्चे को डसने आया था, उसको नेवले ने मारकर उसके बच्चे की जान बचाई थी। किसान की पत्नी तुरंत नेवले के पास आई और उसे हाथ में उठाकर जोर-जोर से रोने लगी कि हाय मैंने ये क्या कर दिया। नेवला तो मर चुका था और मरने वाला वापस आने वाला नहीं है। एक क्षणिक क्रोध ने आकर किसान की पत्नी ने अपने प्यारे नेवले को मार दिया।


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