विश्वशांति के लिए जियो और जीने दो का सन्देश जन-जन को स्वीकारना होगा : मुनि सौरभ सागर


आज की भौतिकतावादी दुनिया में हिंसा दिनों-दिन बढ़ती जा रही है, इसे रोकने के लिए भगवान महावीर के जियो और जीने का संदेश आज जन-जन को स्वीकारना होगा। यह बात जैन मुनि सौरभ सागर जी महाराज ने भगवान महावीर के जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में पाश्र्वनाथ वाटिका में आयोजित कार्यक्रम में शुक्रवार को कही। उन्होंने महावीर के संदेशों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया और कहा कि महावीर की शिक्षाएं आज दुनिया को एक नई दिशा दे रही हैं। आज हर वर्ग के लोग महावीर के आदशरे को जीवन में अपनाकर कर अपना जीवन सुखमय बना रहे हैं।

प्रत्येक व्यक्ति सुखी बनना चाहता है तो उसे अपने से छोटे को सुखी बनाने का भाव मन में लाना होगा और जिस दिन दिल से ऐसा कर लेंगे आपके सुखमय जीवन को कोई नहीं रोक सकता है। इस दौरान मंशापूर्ण महावीर विधान का आयोजन दिनेश जैन एवं उनके परिवारीजनों द्वारा ध्वजारोहण के साथ किया गया। महावीर के माता-पिता वीरज जैन-संगीता जैन, सौधर्म इंद्र मुकेश जैन, कुबेर इंद्र नरेश जैन, यज्ञनायक स्वरूप दिनेश जैन को सौभाग्य प्राप्त हुआ। विधान की सम्पूर्ण विधि क्रियाएं पंडित संदीप जैन सजल ने पूरी की।

मंच पर भगवान महावीर के जन्म कल्याणक के अवसर पर सौधर्म इंद्र का दरबार, माता त्रिशला के सोलह स्वप्न, अष्टकुमारियों द्वारा माता की सेवा का नाटय़ मंचन पूरी भव्यता के साथ प्रस्तुत किया गया। जैन पंचायक के प्रधान राकेश जैन ने बताया कि श्री मंशापूर्ण विधान जैन मुनि सौरभ सागर जी द्वारा रचित है और यह पहली बार यहां हो रहा है। इस अवसर पर राजेश जैन, प्रदीप जैन, मनोज जैन, राजीव जैन, संजीव जैन, मुकेश जैन, नवकार जैन, अक्षय जैन, संजय जैन, कन्हैया जैन, पंकज जैन, हितेश जैन, मेहुल जैन आदि मौजूद थे।


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