मंदारगिरी की पुण्य धरा पर निर्माण हो रहा भव्य मानस्तंभ।


बौंसी के मंदारगिरी दिगम्बर जैन सिद्ध क्षेत्र पर निर्माण हो रहा भव्य मानस्तंभ।करीब 17 वर्ष पूर्व 10 जून 2001को यह मानस्तंभ का शिलान्यास किया था।
जो भागलपुर जैन समाज,स्थानीय लोग और जैन तीर्थयात्रियो के उपस्थिति में किया गया था।
यह मानस्तंभ जैन धर्म के 12 वे तीर्थंकर भगवान वासुपूज्य स्वामी के प्रथम आहार भूमि बारामति मंदिर मे बन रहा है।मानस्तंभ के चारों ओर अनेक प्रकार के कलाकृतियाँ की गई है जो काफी आकर्षक है और आकर्षन का केंद्र भी होगा।
मानस्तंभ का निर्माण लगभग 1 वर्ष से लगातार जारी है जो राजस्थान(मकराना) के सफेद संगमरमर से बनवाया जा रहा है और मकराना के ही कारीगर के साथ 10 लोगों की टीम काम कर रहे है।
मानस्तंभ के मध्य में 4 खड़गाशन प्रतिमा स्थापित होंगे तथा शीर्ष पर 4 पद्माशन प्रतिमा स्थापित होंगे।साथ ही साथ यहाँ चौबीसो टोंक का निर्माण भी हो रहा है जिसमें 24 तीर्थंकरो के खड़गाशन प्रतिमा स्थापित होंगे।
21 लाख के लागत से निर्माण हो रही है मानस्तंभ जो 31 फुट ऊँची होंगी। मानस्तंभ के निर्माण के पश्चात वेदी प्रतिष्ठा महोत्सव का कार्यक्रम किया जायगा। बारामति मंदिर को पत्थर मंदिर के नाम से भी जाना जाता है
बारामति मंदिर का इतिहास काफी प्राचीन रहा है यह मंदिर पूर्ण रूप से पत्थर से निर्मित है,जो कहा जाता है कि महाराष्ट्र के पुणे जिला के स्व0 सेठ चलकचंद जैन कस्तूचंद जी दोसी बारामति वालों ने बनवाया था। यहाँ एक कुआॅ है वो भी पूर्ण रूप से पत्थर से निर्मित है।
क्षेत्र प्रबंधक पवन कुमार जैन ने बताया कि मंदारगिरी जैन धर्म का पावन भूमि है जहाँ भगवान वासुपूज्य स्वामी का तप,ज्ञान एवं निर्वाण भूमि है।यहाँ जैन तीर्थयात्रयो का आने-जाने सिलसिला सालो भर जारी रहता है।

 

 


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