आचार्य श्री विपुल सागर जी महाराज ससंघ का मंगल चातुर्मास कलश धूमधाम के साथ पटना (बिहार) में हुआ स्थापित।


दिगम्बर जैन संत वृद्ध तपस्वी आचार्य श्री 108 विपुल सागर जी महाराज का 45 वां वर्षायोग एवं संघस्थ साधु आचार्य श्री 108 भद्रबाहु सागर जी महाराज व मुनि श्री 108 भरतेश सागर जी महाराज ससंघ का मंगल चातुर्मास कलश स्थापना समारोह रविवार को कदमकुआं स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर मंदिर में धूमधाम के साथ उत्साह पूर्वक आयोजित हुआ।

प्रातः बेला में मूलवेदी श्री 1008 भगवान पार्श्वनाथ स्वामी के समक्ष जिनालय में नित्य अभिषेक , शांतिधारा , पूजन-अर्चना जैन श्रद्धालुओं ने किया ।

भव्य स्वर्णिम चातुर्मास कलश स्थापना समारोह का शुभारंभ ध्वजारोहण , मंगलाचरण नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति के साथ हुआ।

पश्चात चित्र अनावरण , दीप प्रज्वलन , शास्त्र भेंट , गुरुदेव का पाद प्रक्षालन किया गया।

आचार्य श्री ससंघ का मंगल चातुर्मास कलश स्थापना सहित अन्य मांगलिक क्रियायों का पुण्यशाली पात्र डाक बोली के माध्यम से चयनित किया गया।

मंगल चातुर्मास स्वर्णिम कलश श्रद्धालुओं को खूब आकर्षित कर रहा था । जो बेहद ही सुसज्जित आकर्षक लग रहा था। जिसे राजस्थान से मंगवाया गया है।

मुख्य तीन कलश सहित 28 कलशों को मंत्रित सामग्री के साथ श्रावकगण भक्ति-भाव हृदय में संजोय हर्षित मन से स्थापित किया ।

मंगल कलश गुरुदेव आचार्य श्री के मुखारबिंद से मंत्रोच्चारण के साथ विधि विधान शुद्धि पूर्वक जैन श्रद्धालुओं ने जिनालय में स्थापित किया।

इससे पूर्व सकल दिगम्बर जैन समाज पटना ने सामूहिक रूप से गुरुदेव के श्री चरणों में चातुर्मास कलश स्थापना के लिए हर्षोल्लास पूर्वक श्री फल , अर्घ्य  अर्पित किया।

जैन संतो के वर्षायोग को लेकर पटना जैन समाज के बीच उत्साह का महौल है।

कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुगण भक्ति-आराधना के रंग में रंगे नजर आये।

दमोह से पधारे शिक्षा शास्त्री डॉ• अभिषेक भैया जी के मधुर भजनों के प्रस्तुति पर श्रद्धालु खूब झूमें। भक्तिमय वातावरण में भक्ति रस , गुरु भक्ति का श्रद्धालुओं ने खूब आनंद उठाया।

चातुर्मास कलश स्थापना के उपरांत जैन श्रद्धालु कलश स्पर्श के लिए उमड़ पड़े। सभी भक्त बारी – बारी से  मंत्रोच्चारण से पूर्ण कलश को स्पर्श कर प्रभु से मंगल कामना किया।

तत्पश्चात श्रावकों ने संगीतमयी वातावरण में आचार्य गुरुदेव का मंगल आरती कर आशीर्वाद प्राप्त किया ।

प्रवीण जैन (पटना) ने बताया कि चातुर्मास मंगल कलश विश्व शांति व विश्व कल्याण के उद्देश्य और चार माह के भव्य स्वर्णिम वर्षायोग के निर्विघ्न सानंद सम्पन्न होने की मंगल कामना से स्थापित किये जाते है।

इस क्रम में आयोजित होने वाले धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-पाठ , गुरुदेव के मंगल प्रवचन से हमारा जीवन मार्ग प्रशस्त होगा और इस बीच नगर में धर्म ज्ञान की धारा बहेगी। जिसका धर्म लाभ प्राप्त कर जैन अनुयायी पुण्यार्जन करेंगे।

बताया गया कि आचार्य श्री विपुल सागर जी महाराज ससंघ का चातुर्मास में दौरान विशेष परिस्थिति में लगभग 15 किलोमीटर तक विहार संकल्पित है। इस दौरान जैन संत चातुर्मास स्थल से दूसरे स्थल तक एक निश्चित तय सीमा के अंतराल में ही एक स्थान से दूसरे स्थान तक विहार करते है।

आचार्य श्री भद्रबाहु सागर जी महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि आपने चातुर्मास का मंगल कलश तो स्थापित कर दिया , अब आपको भी तप और संयम की ओर बढ़ना चाहिये , तभी यह चातुर्मास सफल व ऐतिहासिक होगा।

आचार्य श्री ने कहा कि अहिंसा धर्म के पालन के लिये जैन साधु वर्षायोग करते है।

वर्षायोग करने का उद्देश्य श्रद्धालुओं में आध्यात्मिक जागरण व श्रद्धा को समीचीन करना है।

मानव 8 माह धनार्जन करके संसार ही बढ़ाता है। वर्षायोग के 4 माह पूण्यार्जन कर मानव जीवन के महत्व को समझना है।

ज्ञातव्य हो कि सकल दिगम्बर जैन समाज पटना के असीम पुण्योदय से चारित्र चक्रवर्ती प्रथमाचार्य श्री 108 शांतिसागर जी महाराज के परंपरा के तृतीय पट्टाचार्य श्री 108 धर्म सागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य वृद्ध तपस्वी आचार्य श्री 108 विपुल सागर जी महाराज ससंघ का 45 वां पावन मंगल वर्षायोग 2019 महामुनि श्री सेठ सुदर्शन स्वामी के पावन निर्वाण भूमि पुण्यधरा पाटलिपुत्र नगरी (पटना) में पुनः हो रहा है।

 

— प्रवीण जैन (पटना)


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