अच्छी संगति से जीवन सुख, समृद्धि और प्रतिष्ठापूर्ण होता है


 बड़ौत, जिसकी जैसी मति होती है, उसकी वैसी ही संगति होती है और उसकी वैसी ही गति होती है। ये उद्गार विहसंत सागर जी महाराज ने श्री दिगम्बर जैन अतिथि भवन में आयोजित एक धर्मसभा के दौरान दिये। उन्होंने कहा कि काफी दुख और चिंता का विषय है कि आज का व्यक्ति अच्छी संगति की जगह बुरी संगति की ओर अग्रसर है और अच्छे संस्कारों की जगह बुरे विचारों को अपना रहा है। आज इंसान जुंआ, शराब, चोरी एवं व्यसनों की तरफ जा रहा है।उन्होंने कहा कि अपने ही घर में चोरी करता, शराब पीकर आता है, झगड़ा करता है, परिवार में कलहपूर्ण वातावरण उत्पन्न करता है, जिससे उसकी समाज में प्रतिष्ठा धीरे-धीरे खत्म हो जाती हैऔर अच्छे मित्र रिश्तेदार दूर होने लग जाते हैं।

मुनिश्री ने कहा कि अच्छी संगति के कारण ही बाल्मीकि डाकू से महिषिर् बाल्मीकि बन गए। इसलिए हमेशा अच्छी संगति में बैठिए, इससे आपके जीवन और परिवार में सुख-समृद्धि का वास होगा और मान-मर्यादा में भी वृद्धि होगी। धर्मसमा का संचालन आर के जैन ने किया। कार्यक्रम में नरेश चंद्र, जयप्रकाश जैन, अतुल जैन, वरदान जैन, मनोज जैन, इंद्राणी जैन, सुधा जैन, सीमा जैन सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे। श्री संदीप जैन ने बताया कि 10 अक्टूबर को श्री विहसंत सागर जी महाराज के पावन सानिध्य में श्री दिगम्बर जैन अतिथि भवन में 24 घंटे का अखंड णमोकार मंत्र जाप होगा।


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